मैं तेरी परछाई 💜 माँ

क्यों एक दिन मनाऊ मैं तेरा माँ 

मुझे तो तू हर दिन अच्छी लगती है ।

गली से गुज़री तो किसी अनजान ने तेरे नाम से पुकारा 

इतनी हुबहू लगती हूँ मैं इस बात से वाक़िफ़ कराया ।


माँ कहाँ कुछ कहती है बस सब कर देती है 

सुबह मेरे उठने से पहले ठंडा पानी भर देती है नहाने के लिए,

बैठे बैठे जो सो जाऊँ तो पर्दा लगा देती है अच्छी नींद के लिए, 

जो अपने बचपन में ना कर पाई वो मुझे करता देख खिल उठती है मेरे लिए,

माँ कहाँ कुछ कहती है अपने लिए ।




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